प्राणायाम किसे कहते हैं मुख्य 6 प्राणायाम कौन-कौन से हैं प्राणायाम करने के लाभ :

प्राणायाम एक प्राचीन भारतीय योग अभ्यास है जो ध्यान और सांस लेने पर केंद्रित है। यह श्वास नियंत्रण का विज्ञान है। प्राणायाम शब्द संस्कृत के प्राण और आयाम शब्द से बना है जिसका अर्थ है जीवन शक्ति को नियंत्रित करने की कला। प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य आत्मा और मन को नियंत्रित करके शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार करना है। अगर इसे नियमित रूप से किया जाए तो यह शरीर और दिमाग का संतुलन बनाए रखता है। प्राणायाम से श्वास धीमी हो जाती है जिससे शांति मिलती है। नियमित प्राणायाम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। भारतीय योग शास्त्रों में उल्लेख है कि श्वास को नियंत्रित करने और ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए प्राणायाम एक महत्वपूर्ण तरीका है। प्राणायाम विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें से प्रत्येक का अपना अर्थ होता है। उन्हीं में से हम 6 मुख्य प्राणायामो पर चर्चा    करेंगे : 

1. भस्त्रिका प्राणायाम: भस्त्रिका प्राणायाम एक प्रकार का श्वास योग है इसे करने के लिए आपको नाक से  तेजी से लम्बी सांस लेनी होगी जिससे प्राण ऊर्जा बढ़ती है और जोर से सांस छोड़नी होगी।
लाभ : भस्त्रिका प्राणायाम करने से शरीर में अतिरिक्त ऑक्सीजन का प्रदान होता है जिससे स्मरण शक्ति बढ़ती है यह प्राणायाम नाक की एलर्जी और श्वसन रोगों में भी लाभकारी है।
निषेध : हाई बीपी, हर्निया, हृदय रोग, कमर दर्द, कमजोरी आदि रोगों में भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए गर्भावस्था और मासिक धर्म की स्थिति में भी भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए। 

2. कपालभाति प्राणायाम :  कपालभाति प्राणायाम श्वास को नियंत्रित करने और शरीर को शुद्ध करने में सहायक होता है इसे करने के लिए पद्मासन में बैठकर गहरी सांस लेते हुए पेट को अंदर की तरफ खींचे और फिर झटके से सांस छोड़ें, शुरुआत में इसे 5 से 10 मिनट तक करें और धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ते जाएं।
लाभ : कपालभाति शरीर की शुद्धि का कार्य करता है यह वजन कम करने के साथ साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पेट की समस्याओं जैसे गैस, एसिडिटी, कब्ज आदि रोगों में सुधार करता है महिलाओं में कपालभाति यूट्रस से जुड़ी समस्याओं और पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी है साथ ही यह पेट के आंतरिक अंगों को मजबूत बनाता है।
निषेध : कपालभाति एक प्रभावी प्राणायाम है लेकिन कुछ रोगों में इसे नहीं करना चाहिए जैसे हार्ट प्रोब्लम, हाई बीपी, हर्निया, पेट में अल्सर होने पर चक्कर आने पर नाक से खून बहने पर और गर्भावस्था के दौरान या फिर डिलीवरी के तुरंत बाद कपालभाति नहीं करना चाहिए मासिक धर्म होने पर भी कपालभाति नहीं करना चाहिए साथ ही यदि आपकी कोई सर्जरी हुई है तो 6 महीने तक कपालभाति न करें।

3. अनुलोम विलोम प्राणायाम :  यह प्राणायाम नासिका में ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है इसे करने के लिए दाहिनी नासिका को बंद करके बाई नासिक से सांस को अंदर खींचे और दाहिनी नासिका से सांस को बाहर छोड़े फिर बाई नासिक को बंद करके दाहिनी नासिका से सांस को अंदर खींची और बाई नासिक से बाहर छोड़ दे इसी क्रम को बार-बार दोहराएं।
लाभ : अनुलोम विलोम प्राणायाम नाड़ी शुद्धि का कार्य करता है यह नाड़यों को शक्ति देता है यह गठिया रोगों में फायदेमंद है यह हृदय, श्वसन तंत्र और फफड़ों को मजबूत बनाता है इसके अलावा यह सर्दी जुकाम दमा तथा नाक की एलर्जी की समस्याओं में भी लाभकारी है यह हाई बीपी, लो बीपी, माइग्रेन, पैरालिसिस डिप्रेशन गुस्सा आदि 
सभी समस्याओं में लाभकारी है।
निषेध : अनुलोम विलोम प्राणायाम पूरी तरह से सुरक्षित है इसे कोई भी कर सकता है इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

4. भ्रामरी प्राणायाम : इस प्राणायाम को करने के लिए दोनों हाथों की तर्जनी उंगली को माथे पर रखें शेष तीन उंगलियां से आंखों को बंद करें और दोनों अंगूठे से कानों को बंद करके नाक से सांस को अंदर खींचे और ओम का उच्चारण करते हुए  सांस को बाहर छोड़े। 
लाभ : 5 से 10 मिनट तक भ्रामरी प्राणायाम करने से तनाव तुरंत कम होता है भ्रामरी प्राणायाम बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी है क्योंकि यह ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता है इसके अलावा यह अनिद्रा की समस्या को दूर करता है और उच्च रक्तचाप को सामान्य करता है।
निषेध : जिन लोगों को सिर में दर्द हो अथवा किसी प्रकार की चोट हो उन्हें भ्रामरी प्राणायाम नहीं करना चाहिए। कान में दर्द या किसी प्रकार का संक्रमण होने पर और गर्भावस्था के दौरान भी भ्रामरी प्राणायम नहीं करना चाहिए।

5. उद्गीथ प्राणायाम : उद्गीथ प्राणायाम करने के लिए गहरी सांस भरें और ओम का उच्चारण करते हुए सांस को बाहर छोड़ें।
लाभ : तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी, माइग्रेन, सिजोफ्रेनिया, नींद ना आना, शरीर में दर्द रहना तथा सभी प्रकार की मानसिक रोगों में उद्गीथ प्राणायाम लाभकारी है।
निषेध : उद्गीथ प्राणायाम बहुत ही महत्वपूर्ण और सरल प्राणायाम है इसे कोई भी आसानी से कर सकता है इसे करने से किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होती है।

6. उज्जाई प्राणायाम : यह प्राणायाम श्वास को केंद्रित करने में मदद करता है इसको करने के लिए गले को टाइट करके नाक से सांस को अंदर भरते हैं ऐसा करते वक्त आवाज होती है फिर यथाशक्ति सांस को अंदर रोकने के बाद दाई नाक को बंद करके बाई नाक से सांस को छोड़ देते हैं
लाभ : जिन्हें गले में बार-बार संक्रमण होता है उनके लिए उज्जाई प्राणायाम बहुत ही लाभकारी है इसके अतिरिक्त थायराइड, साइनस, खर्राटे और टॉन्सिल की समस्या होने और बच्चों में हकलाने और तुतलाने की समस्या होने पर भी उज्जाई प्राणायाम करना लाभकारी सिद्ध होता है। 
निषेध : उज्जाई प्राणायाम को खाना खाने के 1 घंटे बाद कभी भी किया जा सकता है इस बच्चे  और बूढ़े सभी कर सकते हैं। 

प्राणायाम का नियमित अभ्यास आपके शरीर मन और आत्मा में शुद्धि लाता है और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। प्राणायाम विभिन्न योग प्रथाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और आधुनिक जीवनशैली के तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त प्राणायाम का अभ्यास शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करता है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है।

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